Wednesday, May 4, 2011

Bas Chalte Jaana...

 Dedicated to a subtle conversation with my friend Daksh Gaur..on Life and Death..at the midnight of 22nd March 2011..at our favourite hang out place- The Lohegaon Airport,Pune..

रास्ते हो वीरान फिर भी सफ़र तो निभाना पड़ेगा,
हमसफ़र ना तो ना सही मंजिलों को तो पाना पड़ेगा, 
टूट पड़े आसमान या थम जाए साँसें,
ज़िन्दगी कब रुकी है, उसे तो चलते जाना पड़ेगा.


वक़्त है जो गुज़रता नहीं, पीड़ है जो मिटती नहीं,
रात है जो कटती नहीं, सुबह है जो घटती नहीं,
हर लम्हा ठहर सा गया है, आज निश्चल है हवा,
समय के पेहेरों का क्या,उन्हें तो बढ़ते जाना पड़ेगा.


आशा की हर किरण छुप गयी,
दिल की हर तमन्ना मिट गयी,
आँखों के किसी कोने में अब तो कोई सपना भी बाकी ना रहा,
पर हताशा की यहाँ जगह कहाँ, उम्मीद को तो जीते जाना पड़ेगा.


कहानी तो लिखी जा चुकी है, हम तो मात्र पात्र हैं,
आदि क्या,अंत कहाँ? 
किसने है जाना ,क्या जाने कोई??
हम तो कठपुतली हैं, खेल तो दिखाना पड़ेगा!!




मैं आज खड़ी हूँ,निर्बल, बेबस और असहाय,
स्तब्ध, निराश और परेशां...
पर किसी ने सत्य ही कहा है..
राही हैं हम, चलते तो जाना पड़ेगा!!



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