Monday, October 15, 2012

जन्म भर के नाते ...

Goes out for all the amazing people I've met in this life,who stood by me, no matter what..!!

एक दिन और यूँ बीत गया,
इस ज़िन्दगी की राह में ,
एक मोड़ और यूँ ही पीछे छूट गया, 
आगे बढ़ जाने की चाह में ...
इस एक दिन में ना जाने कितना कुछ घटा है,
घट जाने पर भी इसके, जीवन का रस बढ़ सा गया है!
लोग मिले कई, और लोगो से मिली मैं भी ...
कुछ जाने, कुछ अनजाने, कुछ अनूठे से ..
क्या जाने क्या बात थी इनमे ?
यूँ ही एक घनिष्टता बढ़ती चली गयी ..
सादगी भी थी, मदमस्त चंचलता भी,
कुछ गहरे नाते जुड़े , हुई कहीं दिल्लगी भी ,
बाटें कुछ ग़म, तो इकट्ठी की खिलखिलाहटें,
दो पल की बातें और जन्म भर के नाते ...
जीत के इस जूनून में, मैं सब छोड़ चली थी,
पर मन में थी एक अनकही बेकली,
रह न गए हों कहीं वो "लोग" पीछे ...
पर पगला मन ये मेरा समझ ना पाया,
साथ चलते हैं वो "दोस्त "आज भी !!









सच! किसने था जाना, क्या जाने कोई?
ढाई अक्षर का शब्द और असीम है मायने ....

P.S.-The word "बेकली" refers to Fear. (भय)

4 comments:

  1. Keep posting.. u hv expressed the facts vry nicely..
    God bless u :)

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    1. Thank you Sushant...Its very encouraging to know that you like my work..!! :)

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  2. This the best piece written!!
    You're highly expressive.
    *Claps*

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  3. बहुत ही अद्भुत रचना ����������

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